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NPS निवेशकों की बल्ले-बल्ले! पेंशन फंड के विकल्प बढ़े, फीस होगी कम

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Posted On:Friday, January 2, 2026

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को अधिक पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और निवेशक-अनुकूल बनाने के लिए पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने ऐतिहासिक सुधारों को मंजूरी दी है। नए साल 2026 की शुरुआत के साथ ही करोड़ों सब्सक्राइबर्स के लिए रिटायरमेंट प्लानिंग अब और भी आसान और फायदेमंद होने वाली है।

1. बैंकों को मिली पेंशन फंड शुरू करने की अनुमति

अब तक एनपीएस में पेंशन फंड मैनेजमेंट का दायरा सीमित था, लेकिन अब अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (Scheduled Commercial Banks) स्वतंत्र रूप से अपने पेंशन फंड स्थापित कर सकेंगे।

  • फायदा: इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे निवेशकों को बेहतर रिटर्न और अधिक विकल्प मिलेंगे।

  • पात्रता: केवल वही बैंक इसमें शामिल हो पाएंगे जो आरबीआई के कड़े मानकों (नेटवर्थ और मार्केट वैल्यू) पर खरे उतरेंगे।

2. दिनेश कुमार खारा संभालेंगे NPS ट्रस्ट की कमान

एनपीएस की गवर्नेंस और निगरानी को मजबूत करने के लिए ट्रस्ट बोर्ड में अनुभवी दिग्गजों को शामिल किया गया है।

  • चेयरपर्सन: एसबीआई के पूर्व चेयरमैन दिनेश कुमार खारा को NPS ट्रस्ट बोर्ड का नया चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है।

  • अन्य सदस्य: उनके साथ स्वाति अनिल कुलकर्णी (पूर्व UTI AMC) और अरविंद गुप्ता (डिजिटल इंडिया फाउंडेशन) को भी बोर्ड में जगह दी गई है।

3. नया फीस स्ट्रक्चर: 1 अप्रैल 2026 से होगा लागू

निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए निवेश प्रबंधन शुल्क (IMF) को संशोधित किया गया है। अब एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) के आधार पर स्लैब-आधारित फीस ली जाएगी:

  • गैर-सरकारी सेक्टर के लिए: ₹25,000 करोड़ तक के AUM पर 0.12% फीस होगी, जो फंड का आकार बढ़ने के साथ घटकर 0.04% (₹1.5 लाख करोड़ से अधिक पर) तक आ जाएगी।

  • नियामक शुल्क: PFRDA द्वारा ली जाने वाली 0.015% की रेगुलेटरी फीस में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

4. सब्सक्राइबर्स के लिए अन्य प्रमुख नियम (2026 अपडेट्स)

पेंशन सिस्टम को और अधिक लचीला बनाने के लिए कुछ अन्य महत्वपूर्ण बदलाव भी प्रभावी हुए हैं:

  • एग्जिट आयु में वृद्धि: अब सब्सक्राइबर्स 85 वर्ष की आयु तक एनपीएस में बने रह सकते हैं (पहले यह सीमा 75 वर्ष थी)।

  • 100% निकासी: यदि कुल कॉर्पस ₹8 लाख या उससे कम है, तो सब्सक्राइबर पूरी राशि एकमुश्त (Lump sum) निकाल सकते हैं।

  • एनपीएस पर लोन: अब सब्सक्राइबर्स अपने एनपीएस खाते को कोलैटरल (जमानत) के रूप में इस्तेमाल कर विनियमित संस्थानों से लोन ले सकेंगे।

  • आंशिक निकासी: 60 वर्ष की आयु से पहले अब 4 बार आंशिक निकासी की अनुमति दी गई है।

निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?

इन सुधारों का सीधा मतलब है—बेहतर सुरक्षा और ज्यादा मुनाफा। बैंकों के प्रवेश से आप अपने भरोसेमंद बैंक के माध्यम से सीधे पेंशन फंड चुन सकेंगे। साथ ही, अनुभवी बोर्ड और नियंत्रित फीस यह सुनिश्चित करेंगे कि आपका पैसा सुरक्षित हाथों में है और आपको रिटायरमेंट पर एक बड़ा फंड मिल सके।


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