भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज रॉबिन उथप्पा ने टेस्ट क्रिकेट के गिरते स्तर और मैचों के जल्दी समाप्त होने की प्रवृत्ति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। हाल ही में मेलबर्न में आयोजित बॉक्सिंग डे टेस्ट के महज दो दिनों में खत्म होने के बाद, उथप्पा ने आधुनिक दौर के दो दिग्गज बल्लेबाजों—स्टीव स्मिथ और जो रूट—को एक बेहद महत्वपूर्ण सलाह दी है।
उथप्पा का मानना है कि यदि टेस्ट क्रिकेट के अस्तित्व और रोमांच को बचाना है, तो बल्लेबाजों को चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे जैसी पारंपरिक बल्लेबाजी शैली को अपनाना होगा।
मेलबर्न टेस्ट: दो दिन की त्रासदी
ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच खेली जा रही एशेज सीरीज का मेलबर्न टेस्ट चर्चा का विषय बना हुआ है। गेंदबाजों के लिए अत्यधिक मददगार इस पिच पर पहले ही दिन 20 विकेट गिर गए। दूसरे दिन लंच के कुछ समय बाद ही मैच का परिणाम निकल आया और इंग्लैंड ने जीत दर्ज की।
उथप्पा ने इस घटनाक्रम पर निराशा जाहिर करते हुए कहा कि जब पांच दिन का खेल दो दिन में सिमट जाता है, तो यह खेल के प्रशंसकों और टेस्ट क्रिकेट के भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
पुजारा-रहाणे मॉडल: धैर्य और अनुशासन का संगम
रॉबिन उथप्पा ने भारतीय दिग्गजों का उदाहरण देते हुए बताया कि मुश्किल पिचों पर बल्लेबाजी कैसे की जाती है। उन्होंने कहा:
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पिच की समझ: जब गेंद टर्न हो रही हो या ज्यादा स्विंग कर रही हो, तो वहां 300-350 रन की उम्मीद करना बेमानी है।
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संघर्ष करने का जज्बा: पुजारा और रहाणे ने कई बार दिखाया है कि शरीर पर गेंद खाकर और घंटों तक क्रीज पर टिककर कैसे गेंदबाजों को थकाया जाता है।
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लक्ष्य का निर्धारण: उथप्पा के अनुसार, ऐसी पिचों पर अनुशासन के साथ बनाए गए 250 रन भी जीत के लिए पर्याप्त होते हैं, बशर्ते बल्लेबाज आउट न होने का इरादा (Intent) दिखाए।
स्मिथ और रूट को सलाह: 'वनडे माइंडसेट' से बाहर निकलें
जो रूट और स्टीव स्मिथ वर्तमान पीढ़ी के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज माने जाते हैं, लेकिन उथप्पा का मानना है कि 'बैजबॉल' (Bazball) और टी20 के प्रभाव के कारण टेस्ट क्रिकेट में भी बल्लेबाज बहुत जल्दी रन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। "यदि आप टेस्ट क्रिकेट को वनडे या टी20 की तरह खेलेंगे, तो मैच निश्चित रूप से दो दिन में समाप्त होगा। आपको मानसिक रूप से मजबूत होना होगा और विकेट पर खड़े रहने की कला फिर से सीखनी होगी।" - रॉबिन उथप्पा
टेस्ट क्रिकेट को बचाने की चुनौती
उथप्पा की चिंता जायज है क्योंकि टेस्ट क्रिकेट का असली आनंद सत्र-दर-सत्र (Session by Session) खेल के बदलने में है। यदि बल्लेबाज संघर्ष करने के बजाय आक्रामक शॉट खेलकर विकेट गंवाते रहेंगे, तो खेल की तकनीकी गहराई खत्म हो जाएगी। उनका संदेश साफ है—स्मिथ और रूट जैसे कद्दावर खिलाड़ियों को अपनी तकनीक और धैर्य पर वापस लौटना होगा ताकि युवा पीढ़ी टेस्ट क्रिकेट के वास्तविक मूल्य को समझ सके।